M. K. Gandhi
गांधी जी ने जीवन पर्यंत सत्य की साधना की। उनके लिए सत्य ही ईश्वर का पर्याय था। इसकी प्राप्ति के लिए किए गए उनके प्रयास ही सत्य के लिए किए गए प्रयोग बने। फिर भी उनकी विनती थी कि उनके लेखों को प्रमाणभूत न माना जाए। उनके प्रयोगों को दृष्टांत रूप मानकर सब अपने-अपने प्रयोग यथाशक्ति और यथामति करें। गांधी जी ने कहा था : 'मेरा विश्वास है कि मेरी आत्मकथा के लेखों से पाठकों को बहुत कुछ मिल सकता है।' यह पुस्तक राष्ट्रपिता की कार्य पद्धति की महानता के साथ जीवन को समझने में अमूल्य सिद्ध होगी।